नानी!❤️👵

भानूदय की आभा ने स्याही-सा तिमिर भगाया!

उस दिन मेरी नानी ने एक नन्हीं परी को पाया।

मुस्कान जो खिली उस चेहरे पर,

अम्बर भी तब मुस्का दिया

भानु के उदय होने पर,

ख़ुशी के अश्रुओं से धरती को भिगा दिया!

जब तेरी वो मुस्कुराहट याद करूँ

तब सोचती हूँ अब कहाँ जाऊँ!

बस, जी चाहता है कि नानी!

फिर तेरे आँचल में छिप जाऊँ!

 

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तुम्हारे महल रुपी घर के आँगन में

इन नन्हें पैरों ने चलना सीखा था,

तुम्हारी ही असीम पुकारों ने

इस कण्ठ में  स्वर भरा था। 

“बेटा! अच्छे से पढ़ाई करो!”

यह आलोकिक ध्वनि कानों में गूंजती है!

खो जातीं हूँ इसका पीछा करते करते

फिर सोचती हूँ अब कहाँ जाऊँ!

बस, जी चाहता है कि नानी!  

फिर तेरे आँचल में छिप जाऊँ!

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निवाला अपने भाग का भी

मेरे मुख को खिलाती थी।

निदाघ से तपकर जब घर लौटते

तब लस्सी, शिकंजी पिलाती थी।

इस नर्म बिस्तर में वो आनंद नहीं

जो खटिया पर लेट, तुम्हारी कहानियों में होता था!

जब उस खटिया को याद करूँ,

तब सोचती हूँ अब कहाँ सोऊँ!

बस, जी चाहता है कि नानी!  

फिर तेरे आँचल में छिप जाऊँ!

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उन चमचमाते पुरस्कारों से अधिक,

तुम्हारी आँखों की टिमटिमाहट हमें प्यारी है।

हमारे घावों पर मरहम लगाने वाली

वह देवी कल्याणकारी है!

उन कोमल हाथों को स्वैटर बनाते हुए

पुनः निहारने की मैं अभिलाषी हूँ।

पर जब अलमारी में बंद तुम्हारी सिलाइयाँ देखूं,

तब सोचती हूँ अब कहाँ जाऊँ!

बस, जी चाहता है कि नानी!  

फिर तेरे आँचल में छिप जाऊँ!

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आज वर्तमान में विचार करूँ तो

तुम्हारा गुस्सा भी कितना मधुर था!

मेरे अंदर पनपते अवगुणों को

भस्म करने में सक्षम था।

तुम्हारी डाँट की शीतल अग्नि में

मैं फिर से तपना चाहूँ!

तुम तक आने का मार्ग नहीं मेरे पास,

सोचती हूँ अब कहाँ जाऊँ!

बस, जी चाहता है कि नानी!  

फिर तेरे आँचल में छिप जाऊँ!

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अनायास ही कभी कभी

तुम स्वप्नों में दर्शन देती हो!

अपनी स्मृतियों के समंदर में

मेरी नौका धकेल देती हो

जब बीच समंदर ढूँढूँ तुम्हें,

नेत्र खुलते ही ओझल हो जाती हो!

इस लुका छिपी से थककर,

सोचती हूँ अब कहाँ जाऊँ!

बस, जी चाहता है कि नानी!  

फिर तेरे आँचल में छिप जाऊँ!

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लेकिन तुम्हारा आँचल…

वो मैं अब कहाँ से लाऊँ?

क्या तुम चली गयी हो?  नहीं!

अवश्य ही, तुम अभी यहीं हो, मेरे साथ हो!

मेरे बाग रुपी ह्रदय को 

हरा भरा करने का तुम प्रयास हो!

नानी! तुम तो अधूरी पहेलियों को पूर्ण करने की आस हो!

तुम्हें महसूस करूँ मैं, तुम एक अनोखा एहसास हो!

सचमुच, तुम मेरे लिए बहुत ही ख़ास हो!

हाँ नानी! आज तो तुम मेरे कलम की आवाज़ हो!

 — भव्या मल्होत्रा

 मेरी नानी 5 मार्च 2020 को परलोक सिधार गईं। उनकी हर याद हमने अपने दिल के संदूक में सजोईं हुई है! आप सब से गुज़ारिश है कि अपने परिजनों का ध्यान रखें, उनको ढेर सारा प्यार दें क्योंकि कब किसका समय आजाए यह तो ईश्वर के अलावा कौन जानता है!

हमारे अपने हमें कभी छोड़ कर नहीं जाते! भले ही वे कायिक रूप से हमारे संग न हो किन्तु उनका आशीर्वाद सदैव कवच बन हमारी रक्षा करता है क्योंकि

“तू जहाँ जहाँ रहेगा, मेरा साया साथ होगा… “

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34 thoughts on “नानी!❤️👵

  1. The best gift we can have from our loved ones is the assurances that wherever they are ,they will be here by our side always to support us emotionally and mentally ,beyond the bars of physical existence!!
    Their love is like the sky which is infinite and the sun, always lit bright!
    You are among the luckiest ones to owe it ,Bhanu!✨✨
    May her soul rest peacefully in heaven.

    Liked by 4 people

  2. The ones that love us never really leaves us….. They always live in the heart ♥… There can’t be better tribute to your naani other than the poem written so beautifully with your heart…….
    May your naani’s soul rest in peace.. 🙏🙏🙏🙏

    Liked by 1 person

  3. A very emotional and heart touching poem….. Grandparents love you, they support you, they care for you and most importantly they pamper you like ❤ anything…. It’s lucky 🍀to have them in your life ….. What I feel is Grandparents are A crucial ingredient in the family mix….so cherish each lovely💕😍 moment spent with them….

    Liked by 1 person

  4. What role grandparents have in our lives… Can be really expressed in words….. I have the experience and that’s why I am saying that….. But the way you 🙏💕 tried to weave words with your feelings is really commendable….

    Liked by 1 person

  5. बहुत ही ख़ूबसूरत श्रद्धांजलि नानी को। नाना नानी का प्यार उनकी कहानियां जैसे कभी नही भूलती वैसे वे भी जहाँ होते हैं हमें याद करते होंगे। बहुत ही खूबसूरत कविता लिखी है आपने।ईश्वर उन्हें स्वर्ग प्रदान करें।

    Liked by 1 person

    1. Thanks a lot! She was (is) really very very cute… All my friends say so… When she was ill we used to lightly jab her cheeks and then she would cast such a deathly stare which made us laugh with tears in our eyes… Becausr we didn’t know whether we should appreciate her cuteness or lament at her pain… But nevertheless she was (is) lovely!

      Liked by 2 people

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